Monday, September 26, 2011

Amrit Wachan

===========================अमृत वचन=============================

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा :-
  1. केवल खेलने अथवा परेड करने का स्थान नहीं है.
  2. सज्जनों की सुरक्षा का बिन बोले अभिवचन  है.
  3. तरुणों को अनिष्ट व्यसनों से मुक्त रखने वाली संस्कार पीठ है.
  4. समाज पर अकस्मात आने वाली विपत्तियों व संकटों में त्वरित,निरपेक्ष सहायता मिलने का आशा केंद्र है.
  5. महिलाओ की निर्भयता व सभ्य आचरण का आश्वासन है.
  6. दुष्ट तथा देशद्रोही शक्तियों पर अपनी  धाक ज़माने वाली शक्ति है.
  7. सबसे प्रमुख बात यह है की समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रो में देशभक्त तथा सुयोग्य कार्यकर्त्ता उपलब्ध करने वाला विद्यापीठ है.
                                                                                         -----प.पू.बाला साहेब देवरस
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Friday, August 26, 2011

हे वत्सल मयी मातृभूमि  तुझे  सदा प्रणाम करता हूँ.
हे हिदू भूमि तुने ही मुझे सुखपूर्वक बड़ा किया है.
हे महा मंगलमयी पुण्यभूमि तेरे ही कार्य के लिए
मेरी ये काया काम आ जाये. प्रणाम! प्रणाम!!

Tuesday, July 5, 2011

kashmir bachao.

*********************गीत************************
रक्त- शिराओ में राणा का, रह-रह आज हिलोरे लेता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता !!

वीर प्रसूता भारत माँ की ,हम सब हिन्दू है संताने!
हर विपदा जो माँ पर आती सहते हम सीना ताने!!
युग-युग की निद्रा को तज कर, फिर है अपना गौरव चेता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता!!

यह वह भूमि जहा पर नित-नित, जुड़ता बलिदानों का मेला!
इस धरती के पुत्रो ने ही हंस-हंस महामृत्यु को झेला!!
हमको डिगा न पाया कोई, अगणित आये विश्वविजेता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता!!

आज पुनः आक्रांत हुई है,मातृभूमि हम सब की प्यारी!
उठो चुनौती को स्वीकारो,युवको आज हमारी बारी!!
सीमाओ पर अरिदल देखो, हमको पुनः चुनौती देता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता!!

कहीं न फिर हमसे छिन जाये, देव भूमि काश्मीर हमारी!
समय आ गया खीचो वीरो, कोषों से तुम खडग दुधारी!! 
मिटा विश्व से इन दुष्टों को,बने जगत के अतुल विजेता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता!! 
............................!!भारत माता की जय!! ....................................

Friday, June 3, 2011

Save Hindu Girls

Agyani Hindu

अज्ञानी हिंदू पूजते है खूनी व बलात्कारी को..???

साभार नितिनजी
पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक शहर है, बहराइच ।
बहराइच में हिन्दू समाज का सबसे मुख्य पूजा स्थल है गाजी बाबा की मजार।
मूर्ख हिंदू लाखों रूपये हर वर्ष इस पीर पर चढाते है।
इतिहास का जानकर हर व्यक्ति जनता है,कि महमूद गजनवी के उत्तरी भारत को १७ बार लूटने व बर्बाद करने के कुछ समय बाद उसका भांजा सलार गाजी भारत को दारूल इस्लाम बनाने के उद्देश्य से भारत पर चढ़ आया । वह पंजाब ,सिंध, आज के उत्तर प्रदेश को रोंद्ता हुआ बहराइच तक जा पंहुचा। रास्ते में उसने लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम कराया,लाखों हिंदू औरतों के बलात्कार हुए, हजारों मन्दिर तोड़ डाले।
राह में उसे एक भी ऐसाहिन्दू वीर नही मिला जो उसका मान मर्दन कर सके। इस्लाम की जेहाद की आंधी को रोक सके। परंतु बहराइच के राजा सुहेल देव पासी ने उसको थामने का बीडा उठाया । वे अपनी सेना के साथ सलार गाजी के हत्याकांड को रोकने के लिए जा पहुंचे । महाराजा व हिन्दू वीरों ने सलार गाजी व उसकी दानवी सेना को मूली गाजर की तरह काट डाला । सलार गाजी मारा गया। उसकी भागती सेना के एक एक हत्यारे को काट डाला गया। हिंदू ह्रदय राजा सुहेल देव पासी ने अपने धर्म का पालन करते हुए, सलार गाजी को इस्लाम के अनुसार कब्र में दफ़न करा दिया। कुछ समय पश्चात् तुगलक वंश के आने पर फीरोज तुगलक ने सलारगाजी को इस्लाम का सच्चा संत सिपाही घोषित करते हुए उसकी मजार बनवा दी।
आज उसी हिन्दुओं के हत्यारे, हिंदू
औरतों के बलातकारी ,
मूर्ती भंजन दानव को हिंदू समाज एक देवता की तरह पूजता है।
सलार गाजी हिन्दुओं का गाजी बाबा हो गया है। में स्वं बहरैच जा चुका हूँ। लेकिन वहां पर जो पाया,
उसे देखकर बहुत दुःख हुआ। कि हिंदू वीर शिरोमणि सुहेल देव पासी सिर्फ़ पासी समाज का हीरो बनकर रह गएँ है। और सलार गाजी हिन्दुओं का भगवन बनकर हिन्दू समाज का पूजनीय हो गया है। अब गाजी की मजार पूजने वाले,
ऐसे हिन्दुओं को मूर्ख न कहे तो क्या कहे...???

चन्दन हँ इस देश की मिटटी: तपोभूमि हर ग्राम हँ |

गीत

चन्दन हँ इस देश की मिटटी: तपोभूमि हर ग्राम हँ |
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा-बच्चा राम हँ ||

जिसके सैनिक समरभूमि में;गाया करते गीता हँ,
जहा खेत में हल के निचे: खेला करती सीता हँ |
जीवन का आदर्श जहा पर परमेश्वर का धाम हँ,
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा-बच्चा राम हँ |

जहा कर्म से भाग्य बदलना श्रम- निष्ठां कल्याणी हँ ,
त्याग और तप की गाथाये गाती कवी की वाणी हँ |
ज्ञान जहाँ का गंगाजल-सा निर्मल औ अविरामी हँ,
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा-बच्चा राम हँ |

हर शरीर मंदिर सा पावन; हर मानव उपकारी हँ,
जहाँ शेर बन गये खिलोने, गाय जहा माँ प्यारी हँ |
जहा सबेरा शंख बजता, लोरी गाती शाम हँ ,
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा-बच्चा राम हँ |