जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान है.!
इसके वास्ते ये तन है, मन है, प्राण है !!
इसके कण-कण में लिखा राम-कृष्ण नाम है.
हुतात्माओ के रुधिर से भूमि शस्य श्याम है.
धर्म का ये धाम है सदा इसे प्रणाम है.
स्वतंत्र है ये धरा स्वतंत्र असमान है.!1!
जननी जन्मभूमि स्वर्ग.................................................
इसकी आन पर अगर जो बात कोई आ पड़े !
इसके सामने जो जुल्म के पहाड़ हो खड़े !!
शत्रु सब जहान हो विरुद्ध विधि विधान हो !
मुकाबला करेंगे जब तक जान में ये जान है !2!
जननी जन्मभूमि स्वर्ग................................................
इसकी गोद में हजारो गंगा-यमुना झूमती !
इसके पर्वतो की चोटिया गगन को चूमती !!
भूमि ये महान है निराली इसकी शान है !
इसकी जय पताका ही स्वयं विजय निशान है!3!
जननी जन्मभूमि स्वर्ग................................................