Tuesday, July 31, 2012

क्या कभी भारत के दोगले हुक्मरान इजरायल से प्रेरणा लेंगे ?

क्या कभी भारत के दोगले हुक्मरान इजरायल से प्रेरणा लेंगे ?

मित्रो , जब फिलिस्तीनी आतंकवादियो ने 1972 के मिऊनिख ओलंपिक गेम्स विलेज में घुसकर 12 इस्राइली खिलाडियों की हत्या कर दी तब तत्कालीन इस्राइली प्रधानमंत्री श्रीमती गोल्डा मायर ने कोई भी बयान नहीं दिया ... उन्होंने सरे मृत खिलाडियो के घरवालो के खुद फोन करके बोला की हम बदला लेकर रहेंगे .. उन्होंने अपनी गुप्तचर एजेंसी मोसाद को पूरी छुट दे दी और बोला इस घटना में जितने लोग भी शामिल है वो चाहे दुनिया के किसी भी देश में हो उनको जिन्दा नहीं रहने देना है ..

मोसाद ने पता लगा लिया की इस हत्याकांड में 14 आतंकवादी शामिल थे ..




१ - एक आतंकवादी सलाह खलिफ जेदाह में अपने परिवार के साथ रहता था . मोसाद ने उसके घर में रखे टेबल जिस पर फ़ोन रखा था ठीक वैसा ही टेबल रख दिया और टेबल के अन्दर बम फिट करके उसका कनेक्सन फोन से जोड़ दिया .फिर उसके फोन की घंटी बजी उसने जैसे ही फोन उठाया उसके चीथड़े उड़ गए ..




2 - एक आतंकवादी अबू दयुद बेरुत में छुपा था .. मोसाद ने उसकी पूरी दिनचर्या पर नज़र रखी . वो एक क्लब में रोज जाता था .इजराइल ने अपने खतरनाक कमांडो को बेरुत भेजा जिसमे सिर्फ 3 लोग थे एक कमांडो बेंजामिन नेतान्याहू [जो बाद में इसराइल के राष्ट्रपति बने ] एक ख़ूबसूरत लड़की का भेष रखकर उस क्लब में नाच रहे थे जैसे ही वो आतंकवादी उनके करीब नाचने के लिए आया बेंजामिन ने अपनी फुल्ली औटोमटिक गन से गोलियों की बौछार कर दी 15 लोग मरे गए और बेंजामिन और उनका साथी जो उनको कवर कर रहा था लेबनानी पुलिस के नकली गाड़ी में फरार हो गए


3 - एक आतंकवादी अमिन अल हिंदी को मोसाद ने अम्मान में उसके बिल्डिंग के नीचे गोलियों से भुन दिया ..


4 - अब बाक़ी बचे आतंकवादी डरकर आत्मसमर्पण करने का प्रस्ताव भेजा लेकिन गोल्डा मायर ने कुछ नहीं बोला चौथे आतंकवादी अबू फयाज जो छुप कर हेलसिंकी में रहता था उसे कार से कुचल कर मर दिया गया

5 -पाचवे आतंकवादी अली हसन सलामेह जो पेरिस में छुपा था वही उसको साइनाइड से मर दिया गया

6 - महमूद हम्शारी को दमिस्क में गोली मर दी गयी

इस तरह गोल्डा मायर ने एक एक को चुन चुन कर पूरी दुनिया में मारा

हम सलाम करता है ऐसे देश के जज्बे को .. जहा के नागरिक हमेशा अपना सर उठा के चलते है.

साभार - सरफ़रोशी की तमन्ना


Thursday, July 12, 2012

देश प्रेम का मूल्य प्राण है ( कविता )















-----------मासिक गीत (सायं)-------------

देश प्रेम का मूल्य प्राण है, देखे कौन चुकाता  है।
देखे कौन -सुमन शय्या ताज कंटक  अपनाता है।......

सकल मोह ममता को तज कर माता जिसको प्यारी हो.
शत्रु का हिय छेदन हेतु जिसकी तेज कटारी हो .......
मातृभूमि के  राज्य तज जो बन चूका भिखारी हो।...
अपने तन -मन धन जीवन का स्वयं पूर्ण अधिकारी हो।..
आज उसी के लिए संघ ये भुज अपने .फैलाता है।..

देखे कौन -सुमन शय्या ताज कंटक  अपनाता है।...............

कष्ट कंटको  में पड़ करके जीवन पट झीने होंगे।..
काल कूट के  विषमय प्याले प्रेम सहित पीने होंगे।....
अत्याचारों की आंधी ने कोटि  सुमन छीने होंगे.......
एक तरफ संगीने होंगी एक तरफ सीने होंगे।.......
वही वीर अब बढे जिसे हँस -हँस  कर मरना आता है.

देखे कौन -सुमन शय्या ताज कंटक  अपनाता है।...............

भारत माता की जय !!