Friday, August 17, 2012

गोपाल पाठा हिन्दू रक्षक- ग्रेट कलकत्ता किलिंग










गोपाल पाठा
हिन्दू रक्षक- ग्रेट कलकत्ता किलिंग








बंधुवर,
जय श्री राम!!

हमारा देश अनेकानेक जातियों, भाषाओ, प्रान्तों से बना है परन्तु सब प्रान्तों के हिन्दू  लोगो में एक बात सामान है।.मुसीबत की आहट  पाते ही भागना , हम हिंदू मुसीबत को जानने या समझने का प्रयास भी नहीं करते , न ही उसका  सामना करने का या कोई हल ढूँढने का प्रयास करते बस भाग जाने में ही भलाई समझते है।..

ऐसी ही एक मुसीबत टूट पड़ी थी हिन्दुओ पर 16 अगस्त 1946 को कलकत्ता में  'डायरेक्ट  एक्शन ' के रूप में।.
ऐसे में जब मुख्यमंत्री ही मुस्लमान हो सेना या पोलिसे की सहायता आनी  असंभव ही थी। तब एक शख्स " गोपाल पाठा " ने वाकई गोपाल (श्री कृष्ण ) की तरह हिन्दुओ की रक्षा की और दंगाई  मुसलमानों को अच्छा सबक  सिखाया .बहुत कम लोग जानते है की इन्ही गोपाल की वजह से आज कलकत्ता भारत का हिस्सा है वरना मुस्लिमो ने कलकत्ता को  बंगला देश में ले जाने की पूरी तैयारी कर ली थी।

गोपाल पाठा , कलकत्ता का एक मशहूर गुंडा था, करीब 800 लड़के उसके आदेश पर मरने-मारने  के लिए तैयार रहते थे।.. दंगो के समय उसने अपने लडको को स्पष्ट आदेश दिया की अगर तम्हे एक हिन्दू के मारे जाने का पता चलता है तो तुम्हे 10 मुसलमानों की हत्या करनी है।.उस वक़्त कलकत्ता में अमरीकी सेना की छावनी थी जिसके नीग्रो सैनिक  250 रूपए या शराब के बोतल के बदले में हथियार बेच देते थे . गोपाल में मारवाड़ी हिन्दुओ के पैसो से हथियारों का बदोबस्त किया और मुस्लिमो को उन्ही की भाषा  में जवाब दिया।. 

गाँधी ने अनशन के दौरान खुद गोपाल को दो बार बुलाया लेकिन गोपाल ने स्पष्ट मना  कर दिया। तीसरी बार जब एक कांग्रेस के स्थानीय  नेता ने प्रार्थना की "कम से कम कुछ हथियार तो गाँधी जी सामने डाल  दो" तब गोपाल ने कहा "जब हिन्दुओ की हत्या हो रही थी तब तुम्हारे गाँधी कहाँ  थे।.मैंने इन हथियारों से अपने इलाके की महिलाओ की रक्षा की है, मै  हथियार नहीं डालूँगा।.

और जब हिन्दुओ का पलड़ा भारी होने लगा तो सुहरावर्दी ने सेना बुला ली। और दंगे रुक गए।.....