*********************गीत************************
रक्त- शिराओ में राणा का, रह-रह आज हिलोरे लेता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता !!
वीर प्रसूता भारत माँ की ,हम सब हिन्दू है संताने!
हर विपदा जो माँ पर आती सहते हम सीना ताने!!
युग-युग की निद्रा को तज कर, फिर है अपना गौरव चेता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता!!
यह वह भूमि जहा पर नित-नित, जुड़ता बलिदानों का मेला!
इस धरती के पुत्रो ने ही हंस-हंस महामृत्यु को झेला!!
हमको डिगा न पाया कोई, अगणित आये विश्वविजेता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता!!
आज पुनः आक्रांत हुई है,मातृभूमि हम सब की प्यारी!
उठो चुनौती को स्वीकारो,युवको आज हमारी बारी!!
सीमाओ पर अरिदल देखो, हमको पुनः चुनौती देता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता!!
कहीं न फिर हमसे छिन जाये, देव भूमि काश्मीर हमारी!
समय आ गया खीचो वीरो, कोषों से तुम खडग दुधारी!!
मिटा विश्व से इन दुष्टों को,बने जगत के अतुल विजेता!
मातृभूमि का कण-कण त्रिन-त्रिन हमको आज निमंत्रण देता!!
............................!!भारत माता की जय!! ....................................
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