*****************प्रेम **********************
बात करीब २ साल पहले की है , मेरी 7 साल की बड़ी बेटी 'कोमल ' अपनी 3 साल की छोटी बहन 'श्वेता ' के साथ छत पर खेल रहे थे , साथ में पड़ोस के कुछ 10 -12 साल के लड़के भी हमारी छत पर खेल रहे थे। कोमल अपने नाम के अनुसार दुबली , कमज़ोर है और चूहे , छिपकली और कीड़ो को दूर से देख कर ही डर जाती है।
छत पर खेलते हुए अचानक बन्दर आ गये. और एक बन्दर हमारी छत पर भी आ गया उसने मेरी छोटी बेटी श्वेता के कपडे पकड़ लिए। जितने लड़के छत पर खेल रहे थे सभी श्वेता को छोड़ कर नीचे भाग गये , लेकिन डरपोक 'कोमल' ने भागने की बजाए उस बन्दर को आगे बढ़ कर 2 थप्पड़ लगाये और अपनी बहन श्वेता को नीचे ले आई।
शाम को ऑफिस से आया तो बच्चो ने ये घटना सुनाई , मै डर गया की कही बन्दर ने किसी को काटा तो नहीं लेकिन ईश्वर की कृपा से सब ठीक था।
बाद में काफी देर तक सोचता रहा आखिर डरपोक 'कोमल' में इतनी हिम्मत कहाँ से आई और शैतान और लड़ने झगड़ने वाले बच्चे क्यों भाग गए। तब समझ में आया प्रेम में कितनी शक्ति होती है ,अपनी छोटी बहन के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी ने उसे भागने नहीं दिया।
आज हम(मैं भी ) अपनी देश की समस्यायों के लिए अक्सर मुसलमानों को दोषी ठहराते है। (जो की वो है भी ). लेकिन सबसे ज्यादा दोष हम हिन्दुओ का है , कोई फर्क नहीं पड़ता की हम असंगठित है या हमारे ऊपर परिवार की जिम्मेदारी है या मीडिया और राजनीतिक दल हमारे खिलाफ है. दरअसल हम हिन्दू अपने देश से अटूट प्रेम नहीं करते। अगर करते तो आज कश्मीर और पाकिस्तान की समस्याए नहीं होती।
बात करीब २ साल पहले की है , मेरी 7 साल की बड़ी बेटी 'कोमल ' अपनी 3 साल की छोटी बहन 'श्वेता ' के साथ छत पर खेल रहे थे , साथ में पड़ोस के कुछ 10 -12 साल के लड़के भी हमारी छत पर खेल रहे थे। कोमल अपने नाम के अनुसार दुबली , कमज़ोर है और चूहे , छिपकली और कीड़ो को दूर से देख कर ही डर जाती है।
छत पर खेलते हुए अचानक बन्दर आ गये. और एक बन्दर हमारी छत पर भी आ गया उसने मेरी छोटी बेटी श्वेता के कपडे पकड़ लिए। जितने लड़के छत पर खेल रहे थे सभी श्वेता को छोड़ कर नीचे भाग गये , लेकिन डरपोक 'कोमल' ने भागने की बजाए उस बन्दर को आगे बढ़ कर 2 थप्पड़ लगाये और अपनी बहन श्वेता को नीचे ले आई।
शाम को ऑफिस से आया तो बच्चो ने ये घटना सुनाई , मै डर गया की कही बन्दर ने किसी को काटा तो नहीं लेकिन ईश्वर की कृपा से सब ठीक था।
बाद में काफी देर तक सोचता रहा आखिर डरपोक 'कोमल' में इतनी हिम्मत कहाँ से आई और शैतान और लड़ने झगड़ने वाले बच्चे क्यों भाग गए। तब समझ में आया प्रेम में कितनी शक्ति होती है ,अपनी छोटी बहन के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी ने उसे भागने नहीं दिया।
आज हम(मैं भी ) अपनी देश की समस्यायों के लिए अक्सर मुसलमानों को दोषी ठहराते है। (जो की वो है भी ). लेकिन सबसे ज्यादा दोष हम हिन्दुओ का है , कोई फर्क नहीं पड़ता की हम असंगठित है या हमारे ऊपर परिवार की जिम्मेदारी है या मीडिया और राजनीतिक दल हमारे खिलाफ है. दरअसल हम हिन्दू अपने देश से अटूट प्रेम नहीं करते। अगर करते तो आज कश्मीर और पाकिस्तान की समस्याए नहीं होती।
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