Monday, October 31, 2011

इन सभी संगठनो  ने  किसी न किसी विवाद के चलते हथियार उठाये है. जबकि इस्लाम ने तो बिना किसी विवाद के सारी मानवता के खिलाफ हथियार उठाये है, बलात्कार किये है, जबरन धर्म परिवर्तन पर मजबूर किया है. नरसंहार किया है. इस्लाम तो अपने से अलग विचारधारा वाले को बर्दास्त ही नहीं करता .इस्लाम से बड़ा आतंकवादी कोई नहीं. ईश्वर सारी दुनिया को इस्लाम के अत्याचारों से मुक्ति दे.हे राम.

@तारिक  साहेब . 
मुसलमानों की  बहादुरी पर इतना मत इतराओ , जरा इस्रैल को देखो जिसने 6 मुस्लिम देशो से घिरे होने के बावजूद सबको बुरी तरह पीटा, अगर आप कही जीत रहे हो तो वो हिंदुस्तान है क्योकि यहाँ हिन्दुओ के दिमाग में गाँधी बैठा हुआ है. अगर गाँधी नहीं होता तो 1947 में ही पता चल जाता. जिस दिन हिन्दुओ के दिमाग से सेकुलेरवाद का कीड़ा नक़ल गया उस दिन इस्लाम का तो अल्लाह ही मालिक है. हमारे देश में रह कर यहाँ के हिन्दुओ के पैसे से हज कर रहे हो फिर भी हिन्दुओ के खिलाफ ज़हर उगल रहे हो सुच है तुम मुसलमान भरोसे के काबिल नहीं हो. जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो..

ये संघ ही है जो इस्लाम की जुल्मो के सामने चट्टान की तरह खड़ा है. तारिक जी आपको दर्द तो होगा ही..संघ ने ही गोधरा कांड में मारे गए हिन्दुओ का बदला लिया..मिर्च तो लगेगी ही न..


@तारिक साहब ! तसलीमा जी का इतना ही कहना है की अगर मुस्लिम पुरुषो को जन्नत में   ७२ हूर मिलेंगी तो औरत को क्या मिलेगा.अगर औरत को कुछ नहीं मिलेगा तो यही ले ले बस , और आप उनकी जान के पीछे पड़ गए.इतना ही तकलीफ हुई तो  दूसरो को भड़काने की बजाय खुद ही तसलीमा को मारो और पकडे गए तो जन्नत चले जाना  और ७२ हूरो के साथ ऐश करो..

मुस्लिमो को समझाना बेकार है.मगर मुझे चिंता इस बात की है की इन सेकुलर चुतियो को कैसे समझाऊ , ये तो हमारे देश को मिटा के ही अपनी रोटी सकेंगे ..हिन्दू समाज में जातिगत भेदभाव की समाप्ति , संगठन तथा देशभक्ति  का प्रचार प्रसार ही इस समस्या से निजात दिला सकता है..






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